- Netizens hail Varun Dhawan’s acting in Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai call it a ‘Paisa Vasool Entertainer'
- June Calls for a Laugh: The Best Comedy Titles to Stream on Netflix
- एका मोबिलिटी ने पुणे प्लांट से 1,000वें एससीवी को हरी झंडी दिखाई
- मोटोरोला ने लॉन्च किया edge 70 pro+, जो 2026 का सबसे स्टाइलिश फ्लैगशिप किलर स्मार्टफोन है
- जावेद जाफरी ने सरोज खान को दिया श्रेय, कहा उन्होंने सिखाया कि डांस में एक्सप्रेशन कितनी अहम है
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक- स्थापना दिवस समारोह
देश के कृषि एवं ग्रामीण विकास को समर्पित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के स्वर्णिम 44 वर्ष
जुलाई 2025 को नाबार्ड, मध्य प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल में 44 वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। इस दौरान कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों की समग्र विकास यात्रा में नाबार्ड के 43 वर्षों के महत्वपूर्ण योगदान को स्मरण किया गया।
कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से 12 जुलाई 1982 को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना की गयी थी। 44 वर्ष की इस गौरवशाली विकास यात्रा में नाबार्ड के कार्यकलापों ने कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में केसीसी से लेकर जल संग्रहण, आदिवासी विकास, ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास, ग्रामीण गोदाम, पैक्स, स्वयं सहायता समूह तथा एफपीओ जैसे कई नवोन्मेषी कार्य किए।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे श्री अशोक कुमार बर्णवाल, आईएएस, एसीएस ने कृषि एवं ग्रामीण विकास में नाबार्ड की आवश्यकता पर बल दिया दिया। उन्होंने कहा कि जब अन्य बैंक कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण प्रदान करना जोखिम का कार्य समझते थे तब नीति निर्माताओं ने नाबार्ड की स्थापना की। नाबार्ड ने बैंको को कृषि क्षेत्र में वित्त पोषण हेतु सहज बनाया और उन्हें प्रत्याशित सहयोग प्रदान किया। धीरे-धीरे नाबार्ड के कार्यों में विविधता आई और ग्रामीण विकास के अन्य पहलुओं से संबन्धित परियोजनाएं कार्यान्वित की। आरआइडीएफ के तहत ऋण लेने में राज्य सरकार सहज महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के ग्रामीण विकास में नाबार्ड की भूमिका बहुत ही सकारात्मक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में इतनी अच्छी प्रगति नहीं हो पाती यदि नाबार्ड की यह पुनर्वित्त योजना न होती। पैक्स कंप्यूटरीकरण में चुनौतियां हैं किंतु नाबार्ड के सहयोग से हम उसे भी पार कर जाएंगे। उन्होंने कहा की मध्य प्रदेश के विकास में नाबार्ड का महत्वपूर्ण योगदान है।
श्रीमती सी सरस्वती, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने अपने सम्बोधन में नाबार्ड की चार दशकों की गौरवशाली विकास यात्रा के संबंध में अवगत कराया। प्रत्येक दशक में नाबार्ड द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का एक कैनवास प्रस्तुत किया। पहले दशक में जिला विकास प्रबंधक कार्यालय की स्थापना, क्रेडिट प्लानिंग की प्रणाली पर नाबार्ड ने फोकस किया। पुनर्वित और संस्थागत विकास नाबार्ड के प्रमुख कार्य रहे। दूसरे दशक में स्वयं सहायता समूह-बैंक संयोजन कार्यक्रम के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर फोकस किया गया जिसे सूक्ष्म वित्त के क्षेत्र में क्रान्तिकारी कदम माना जाता है। इसी दशक में किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत भी हुई जिससे किसान गैर संस्थागत उधारियों के जाल में से बाहर निकल पाये। ग्रामीण आधारभूत संरचना निधि के माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास को नए पंख लग गए। लेह जैसी जगहों पर भी अच्छी सड़कें नाबार्ड के आरआईडीएफ़ के परिणाम हैं। तीसरे दशक में तत्कालीन आवश्यकताओं के अनुसार नाबार्ड ने वित्तीय समावेशन, आजीविका विकास, आदिवासी विकास, वाटरशेड विकास जैसे संधारणीय एवं अनुकरणीय कार्य किये। चौथे दशक में डिजिटलीकरण का महत्वपूर्ण कार्य किया गया। इसके साथ ही साथ कृषक उत्पादक संगठन/ कृषक उत्पादक कंपनियों का संवर्धन नाबार्ड के प्रमुख प्रयासों में से है। इस दौरान जलवायु परिवर्तन और वित्तीय समावेशन पर अधिक फोकस रहा। वर्तमान दशक में नाबार्ड ने पैक्स कंप्यूटरीकरण के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । नाबार्ड की स्थापना जिन उद्देश्यों के लिए की गयी थी उससे इतर क्षेत्रों में कार्य के लिये नाबार्ड ने अनुषंगी संस्थान स्थापित किए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की धारा निर्बाध रूप से चलती रहे। नैब संरक्षण, नैब फिन्स, नैब किसान, नैब कॉन्स आदि के माध्यम से उन क्षेत्रों में भी कार्य किया जा रहा है जहाँ प्रत्यक्ष रूप से नाबार्ड कार्य नहीं कर सकता है। इस अवसर पर उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया नाबार्ड के स्थापना दिवस की शुभकामनायें दीं।
विशिष्ट अतिथि श्री आरसी बेहेरा, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक ने नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित सभी परियोजनाओं की सराहना की जिसके माध्यम से कृषि-प्रधान ग्रामीण भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। नाबार्ड की अधिकांश योजनाओं में बैंको की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। इस भूमिका का निर्वहन करते हुए मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक ने किसानों, स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों आदि के लिए वित्त पोषण का कार्य किया है। किसानों की आय दोगुना करने में नाबार्ड की परियोजनाएं बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन जमीन कम हो रही है और आबादी बढ़ रही है। इस बढ़ती हुई आबादी की खाद्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सीमित कृषि भूमि से अधिक कृषि उपज प्राप्त हो सके इस हेतु नाबार्ड के द्वारा समय समय पर विभिन्न प्रकार के अध्ययन करवाए जाते हैं जिससे खाद्य आपूर्ति की समस्याओं को हल किया जा सकता है।
श्री विवेक कृष्ण पाटिल, सहायक महाप्रबंधक द्वारा नाबार्ड की विकास यात्रा को एक प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया जिसमे स्वयं सहायता समूह, जलवायु परिवर्तन, संस्थागत विकास, कृषि विकास, आदिवासी विकास, स्मार्ट हाइड्रोपोनिक परियोजना, वॉटरशेड, कौशल प्रशिक्षण, पेयजल परियोजना, वित्तीय साक्षरता, पैक्स कंप्यूटरीकरण, पुनर्वित योजना, पर्यवेक्षीय कार्य, क्रेडिट प्लानिंग, राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी जैसे कार्यों के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि में नाबार्ड के योगदान को दर्शाया गया।
इस अवसर पर कुछ लाभार्थी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे जिन्होंने नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित पहलों के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया। उनमें से एक श्री मोती सिंह जी ने अपने जीवन में आए बदलावों के बारे में बताया। उन्होंने कहा उनके पास बंजर जमीन थी जिसमें कोई उपज नहीं होती थी और आय अर्जन के लिए वे शहरों की ओर मज़दूरी के लिए घर-परिवार छोड़कर जाते थे। नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित टीडीएफ परियोजना के अंतर्गत विभिन्न फलदार पौधे उनकी जमीन में लगाने के लिए दिए गए। प्रारंभिक आय प्राप्त हो इसे ध्यान में रखते हुए सब्जियों का प्रशिक्षण भी दिया जिससे वे स्वरोजगार हेतु सक्षम हो सके। जो पहले अन्य शहरों में जाकर मजदूरी किया करते थे अब वे अपने घर-परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर पा रहे हैं। सभी लाभार्थियों ने नाबार्ड का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन श्री सलिल झोकरकर, उप महाप्रबंधक ने किया ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार बर्णवाल, आईएएस, एसीएस के अतिरिक्त अन्य हितधारक, लाभार्थी, उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि और नाबार्ड, मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय के सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।


